इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित ‘बोधघाट परियोजना का विरोध

लोहंडीगुड़ा के पंचायत प्रतिनिधियों और किसानों ने सौंपा ज्ञापन
जगदलपुर।
बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाटविद्युत परियोजना का ग्रामीणों, किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पुरजोर विरोध किया है। इस संबंध में जनपद अध्यक्ष लोहंडीगुड़ा के माध्यम से शासन को ज्ञापन प्रेषित किया गया है।
बस्तर के दर्जनों किसानों, ग्रामीणों, जनपद सदस्यों और पंच-सरपंचों के हस्ताक्षर वाले इस ज्ञापन में कहा गया है कि इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना के संबंध में अपनी गंभीर चिंताओं और असहमति को आपके समक्ष रख रहे हैं। इस परियोजना के निर्माण से क्षेत्र में होने वाले व्यापक नुकसान को देखते हुए हम इसे पूरी तरह बंद करने की मांग करते हैं। इसके पीछे ग्रामीणों ने ठोस तर्क भी दिए हैं। उनके मुताबिक परियोजना के निर्माण से बस्तर के हजारों हेक्टेयर में फैले समृद्ध और सघन वन पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे। यह जंगल हमारी आजीविका, संस्कृति और पहचान का मुख्य आधार हैं। बांध के डूब क्षेत्र में आने के कारण दर्जनों गांवों के हजारों आदिवासी और किसान परिवार बेघर हो जाएंगे। जल-जंगल-जमीन से दूर होने के कारण हमारी अनूठी बस्तरिया संस्कृति, परंपराएं और अस्तित्व संकट में पड़ जाएंगे।इंद्रावती नदी और बस्तर के जंगलों में दुर्लभ वन्यजीव और औषधीय पौधे पाए जाते हैं। बांध बनने से इस क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। पेसा कानून के तहत स्थानीय ग्राम सभाएं अपनी जमीन और संस्कृति को बचाने के लिए इस परियोजना का लगातार विरोध कर रही हैं। स्थानीय जनता का इस विकास मॉडल पर विश्वास नहीं है जो उन्हें उनकी ही जमीन से बेदखल कर दे। बस्तर की अनूठी संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय आदिवासियों व किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बोधघाट परियोजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की गई है।

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