रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य औषधि नियंत्रण विभाग ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन सहित पांच प्रमुख दवाओं को गुणवत्ता परीक्षण में विफल (अवमानक) पाया है। इस खुलासे के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है और विभाग ने तत्काल प्रभाव से इन दवाओं की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
जांच में सामने आईं गंभीर खामियां अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का बैच नंबर-7881 गंभीर रूप से अमानक पाया गया है। इसके अतिरिक्त, रायपुर स्थित खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में की गई जांच में चार अन्य दवाएं भी गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
इन दवाओं के बैच हुए अमानक: विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, जिन दवाओं के बैच को अमानक घोषित किया गया है, उनमें शामिल हैं:
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन (बैच नंबर-7881)
नाक्पेन-पी (उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित कंपनी)
फ्लामो स्टार-एपी टैबलेट
एसीएचई-पी (हिमाचल प्रदेश की कंपनी)
कोल्डजिया टैबलेट (हिमाचल प्रदेश की कंपनी)
सप्लाई करने वाली कंपनियों पर उठ रहे सवाल जांच में यह भी सामने आया है कि अमानक दवाओं की आपूर्ति उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश स्थित कंपनियों द्वारा की गई थी। इस मामले ने दवा वितरण प्रणाली में लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. हीरा सिंह लोधी ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से अमानक दवाओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है।
विभाग ने जारी किए निर्देश औषधि नियंत्रण विभाग ने प्रदेश के सभी जिला औषधि नियंत्रण अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि:
स्टॉक की जांच: सभी दवा विक्रेता, थोक वितरक और अस्पताल अपने स्टॉक की तुरंत जांच करें।
बिक्री पर रोक: यदि किसी के पास इन बैचों की दवाएं मिलती हैं, तो उनकी बिक्री और उपयोग तुरंत रोक दिया जाए।
तत्काल सूचना: संदिग्ध बैच की दवाएं पाए जाने पर इसकी सूचना संबंधित जिले के औषधि नियंत्रण कार्यालय को दी जाए।
आम नागरिकों से अपील स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की है। यदि किसी नागरिक को संबंधित दवाओं के बारे में कोई संदेह हो या दवा के सेवन से कोई विपरीत प्रभाव दिखे, तो वे तुरंत इसकी शिकायत प्रशासन से करें। विभाग का कहना है कि मरीजों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।






