सीटों के परिसीमन का BJP षडयंत्र विफल, अत: वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही -कांग्रेस

रायपुर। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल के नाम पर भाजपा परिसीमन बलि पास कराना चाह रही थ्री। जिला कांग्रेस के शहर अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने कहा कि भाजपा की यह रणनीति अब जनता के सामने आ चुकी है। जब महिला आरक्षण पहले ही 2023 में पारित किया जा चुका है, तो चार राज्यों में चुनाव के समय संसद का विशेष सत्र बुलाकर पास कराने के पीछे की मंशा क्या थी। कांग्रेस पाटीे महिला आरक्षण के पक्ष में हमेशा रही। पार्टी ने परिसीमन बिल का विरोध किया। अब भाजपा के इस षडयंत्र का कांग्रेस पर्दाफास करेगी।
कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में रायपुर ग्रामीण अध्यक्ष राजेंद्र पप्पु बंजारे, दीप्ति दुबे, वार्ड अध्यक्ष अर्जुमन ढेबर सहित कई कांग्रेस नेताओं ने अपने पक्ष रखे। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार के परिसीमन बिल पर अन्य राज्यों को आपत्ति थी, भाजपा महिला आरक्षण को सामने रख कर परिसीमन चाहती थी।
भाजपा 2011 के जनगणना पर परिसीमन करना चाहती है। जब 2026-27 वही ती जनगणना के सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा? महिला आरक्षण बिल को यदि करना है तो परिसीमन का इंतजार किये बिना वर्तमान सदस्य संख्या का आधा क्यों नहीं देना चाहती सरकार? सरकार 2023 महिना नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू करना क्यों नहीं चाहती। जबकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2021 जो कानून बन चुका है 2036 से मूर्त रूप लेगा संशोधन से तुरंत लागू हो जाता।
भाजपा की मंशा महिला आरक्षण ही अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थी जो विपक्षी दलों की एक जुटता से नही हो चुका।
कांग्रेस महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक
पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संमय हो पाया। सभी राजीव गाधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पहले हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में लीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिपई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं।

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