नगर निगम जगदलपुर में पदोन्नति के नाम पर धांधली

छूट के लिए करते हैं उम्र का इंतजार और अंततः नहीं देते पदोन्नति
जगदलपुर।
नगर पालिक निगम जगदलपुर में विगत कई वर्षों से एक ही स्थान पर बैठे लिपिक की इतनी दादागिरी बढ़ गई कि वह शासन के नियमों को दरकिनार करते हुए पदोन्नति समिति में प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं और समिति को नियमों का ज्ञान नहीं होने के कारण सिर्फ वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति प्रदान की जा रही है।
स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष एवं नगर निगम कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दुबे ने कहा है कि नगर निगम अधिनियम के मुताबिक 5-6 वर्ष में कर्मचारियों को पदोन्नति देने का प्रावधान है। इस संबंध में कि नगर निगम अधिनियम 1956 के तहत वर्ष 2018 में संशोधित आदेश जारी किया गया है। अब इसमें नया खेल शुरू किया गया है कि नगर निगम में रिक्त पद होने के बाद भी पदोन्नति नहीं दी जा रही है। क्योंकि शासन ने एक नियम जारी किया है कि कंप्यूटर की योग्यता होनी चाहिए। यानि वार्षिक डीपीसी की बैठक नहीं होगी। जब कोई छूट का लाभ लेगा तभी वरिष्ठता सूची जारी होगी। इस खेल में निकाय के ही कई लिपिक शामिल हैं एवं वरिष्ठता और छूट के आधार पर बैठे हुए हैं। जबकि वरिष्ठता के बाद योग्यता नहीं रखने पर नीचे के कर्मचारी को पदोन्नति देने ने का नियम है जो कि उस अवधि में अपनी पूर्ण योग्यता रखता है। परंतु डीपीसी में ऐसा न करते हुए सिर्फ वरिष्ठता पर ध्यान देकर निर्णय लिया जाता है। जबकि वरिष्ठता सूची जारी करने के दौरान पदोन्नति का दिनांक, सीधी भर्ती लिखा जाता है एवं योग्यता सह उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति दी जाती है। पिछली सभी पदोन्नतियों में इसे दरकिनार करते हुए निर्णय लिया गया है और स्थानीय ऑडिट ने उसे पास भी कर दिया क्योंकि किसी के पास दावा, आपत्ति की सूचना नहीं जाती है। न ही स्वीकृत पद की जानकारी कर्मचारियों को दी जाती है और न ही भरे पद की? स्थानांतरित कर्मचारियों को प्रति वर्ष वरिष्ठता सूची भी उपलब्ध नहीं कराई जाती और न ही विभागीय वेबसाइट में इसका उल्लेख करके सार्वजनिक किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत एक कर्मचारी का यह मौलिक अधिकारी है जिसे उच्च न्यायालय ने अमृत राव लेजवार विरुद्ध नगर निगम रायपुर के प्रकरण में सही माना है। योग्यता नहीं होने पर मात्र ही छूट के लिए किसी योग्य कर्मचारी को पदविहीन नहीं किया जा सकता है और न ही उसे पदोन्नति से रोका जा सकता है। शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि 5 वर्षों में पदोन्नति दी जानी है, मगर उसमें यह नहीं लिखा गया है कि वार्षिक पदोन्नति को छोड़कर कर्मचारियों को छूट के आधार पर पदोन्नति दी जाए। रिक्त पदों की गणना वार्षिक तौर पर कर डीपीसी में प्रस्तुत किया जाना होता है। और इसकी सूची जारी करना नियमों के अधीन है। उम्र और योग्यता के विरोधाभास में पदोन्नत नहीं किया जाना नियमतः गलत है।vनगर निगम जगदलपुर में इसका दुरुपयोग किया जा रहा है। योग्यता होने के बाद भी वर्षों तक पदोन्नति लंबित रखना दुर्भाग्यजनक है जिससे यह प्रतीत होता है कि 2008 में सीधी भर्ती के पदों पर नियुक्त कर्मचारियों को योग्यता के आधार पर पीछे करना अनुचित है। कर्मचारियों ने शासन और एमआईसी से अनुरोध किया है कि 2008 के बाद सभी पदोन्नति की जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए। वर्तमान वरिष्ठता सूची में वर्ष 2013 से सुधार किया जाए और रिक्त पद की गढ़ना करते हुए पदोन्नति प्रदान किया जाए। जिस प्रकार से मंत्रालय के लोग और अन्य विभाग के अधिकारी वरिष्ठता सूची को पीडीएफ के माध्यम से विभाग की वेबसाइट पर डाउनलोड करते हैं इसी तरह से जगदलपुर नगर निगम को यह कदम उठाना चाहिए। अन्यथा डीपीसी को कोई भी चैलेंज कर देगा

वनिश दुबे

पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष

स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ/ पूर्व अध्यक्ष नगर निगम कर्मचारी संघ जगदलपुर

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