महाशिवरात्रि पर पलारी के वार्ड 11 में गूंजा ‘ॐ नमः शिवाय’ भव्य प्राण-प्रतिष्ठा, रुद्राभिषेक व हवन से शिवमय हुआ वातावरण

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नगर पंचायत पलारी के वार्ड क्रमांक 11 में नवनिर्मित नर्मदेश्वर शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ भव्य रूप से संपन्न हुई। श्री श्री मंगलनाथ नर्मदेश्वर महादेव के नाम से स्थापित इस शिवालय में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गुंजायमान रहा, जिससे वातावरण पूर्णतः शिवमय हो उठा।प्रातः 10 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 2:30 बजे तक चले मुख्य धार्मिक अनुष्ठान में श्री महाराज सच्चिदानंद पाठक कालीमंदिर सारागाव वाले ने वैदिक ब्राह्मणों के सान्निध्य में गणपति पूजन, वेदी पूजन, कलश स्थापना और मंत्रोच्चार के बीच प्राण-प्रतिष्ठा की दिव्य प्रक्रिया संपन्न किया। श्रद्धालुओं ने दूध, दही, घृत और चंदन से शिवलिंग का विधिवत रुद्राभिषेक कर भगवान शिव से परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। शिवलिंग के साथ भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय एवं माता पार्वती की प्रतिमाओं की भी प्रतिष्ठा की गई, जिससे मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।अनुष्ठान के अंतिम चरण में विधि-विधानपूर्वक हवन कर पूर्णाहुति दी गई। यज्ञ की पवित्र अग्नि, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और भक्तों की आस्था ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित और प्रेरणादायक बना।इस धार्मिक आयोजन में वार्डवासियों के साथ नगर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से शैल ध्रुव, कुमारी धुरंधर, गोदावरी साहू, कांति साहू, पुष्पा चंद्राकर, सुनीता साहू, पूर्णिमा चंद्राकर, शांति चंद्राकर, दिगेश्वर चंद्राकर, सत्येंद्र पटेल, वेद प्रकाश साहू, योगेश धीवर, खेलन चंद्राकर, रवि चंद्राकर, रोशन वर्मा, तुलसी साहू, खेमलाल साहू, लुकेश देवांगन, टुकेश्वर वर्मा, सरिता वर्मा, पुष्पा पटेल, विभा चंद्राकर, रेनू वर्मा, निधि चंद्राकर, प्यारी साहू, प्रभा देवांगन एवं ममता धीवर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।आयोजकों ने महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में आयोजित विशाल भंडारे में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है। यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सहयोग और सामूहिक समर्पण की अद्भुत मिसाल के रूप में भी उभरकर सामने आया।

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