रायपुर। छत्तीसगढ़ में वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे को लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताते हुए राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि प्रारंभिक जानकारी से स्पष्ट है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम कराया गया, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।
उन्होंने उद्योग सुरक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नियमित निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट में ढिलाई बरती गई, जिसके कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने राज्य के सभी औद्योगिक संस्थानों में व्यापक सुरक्षा जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बावजूद हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने दोषियों पर कड़ी धाराएं लगाने, हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश से जांच कराने और तकनीकी स्तर पर विस्तृत जांच की मांग की है। साथ ही, उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज और राज्य में आधुनिक बर्न अस्पताल स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रेस वार्ता के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने आपत्ति जताई। दीपक बैज का कहना है कि यदि इसे लागू किया गया तो आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के संरक्षण को जरूरी बताया।
इसके अलावा कांग्रेस ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि इसे पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से लागू किया जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि पहले जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर, वर्तमान व्यवस्था के आधार पर ही आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, वेदांता हादसे ने छत्तीसगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और नीतिगत मुद्दों पर नई बहस को जन्म दे दिया है, और अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है।
वेदांता हादसे पर बवाल, कांग्रेस ने उठाए सुरक्षा और जवाबदेही के सवाल






