शराब में ओवर रेट, साजिश अधिकारियों की, बदनाम कर रहे भाजपा सरकार को

नकली शराब, मिलावट, ओवर रेटिंग, भूपेश सिस्टम अभी भी जारी ब्लेक लिस्टेड सेल्समैनेजर फर्जी आईडी नकली आधार के माध्यम से फिर से पूरे प्रदेश में शराब दुकान की कमान हाथों में साय सरकार की छवि धूमिल करने साजिशे बिक रहा रायपुर में नकली शराब भाजपा शासन में चल रहा भूपेश का सिस्टम, अधिकारी और कोचिए बिकवा रहे रूस्तम भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करने विभाग के अधिकारियों की साजिश कांग्रेस के छुटभैया नेताओं की मिलीभगत से बिक रही नकली शराब

आबकारी विभाग पर कर्मचारियों के साथ दुव्र्यवहार के आरोप लालपुर शराब भट्टी चर्चा में, नकली शराब जांच में कर्मचारियों को निशाना बनाने का आरोप हिरासत में मारपीट और दुर्व्यवहार का दावा, पानी के नाम पर मनमानी

आबकारी विभाग में एक अजीबो-गरीब सिस्टम चल रहा है, सरकार बदल जाने के बाद भी तथाकथित अधिकारी और कोचिए मिलकर बदस्तूर भूपेश सरकार वाले सिस्टम को धड़ल्ले से चला रहे है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में नकली शराब के खिलाफ चल रही आबकारी विभाग की कार्रवाइयों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रदेशभर में भाजपा शासन को बदनाम करने की साजिश की जा रही है वही आबकारी विभाग के 2000 हज़ार करोड़ के घोटाले में जैसे भूपेश सरकार के मॉडल सिस्टम कायम था। वही आज भी भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करने की आबकारी विभाग के अधिकारियों की नाकाम कोशिश जारी है। कांग्रेस के कई छुटभैया नेता है जिनके इशारे से नकली शराब की बिक्री हो रही है। आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर छोटे स्तर के कर्मचारियों को हिरासत में लेकर प्रताडि़त किया जा रहा है, जबकि कथित रूप से जि मेदार उच्च स्तर के व्यक्तियों पर अपेक्षित स ती नहीं दिखाई जा रही। इस संदर्भ में लालपुर स्थित शराब भट्टी से जुड़ा एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पीडि़त पक्ष ने अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। मामले से जुड़े व्यक्तियों का दावा है कि वर्ष 2025 में नकली शराब के विरुद्ध आबकारी और उडऩदस्ता टीम की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मु य सुपरवाइजऱ के बजाय कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। हिरासत में लिए गए कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उनके साथ दुव्र्यवहार और मारपीट की गई। इन आरोपों में विशेष रूप से आबकारी विभाग की अधिकारियों का नाम लिया गया है। पीडि़त पक्ष का कहना है कि हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पानी मांगने पर पेशाब पिलाई गई पीडि़त पक्ष के प्रतिनिधि ने जनता से रिश्ता को बातचीत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ पूछताछ के दौरान अपमानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि पानी मांगने पर पेशाब पिलाई गई है, और संबंधित कर्मचारियों द्वारा मारपीट भी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। हो सकता है पीडि़त उतावले पन में झूठा आरोप भी लगा रहे हो। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अवैध और नकली शराब के खिलाफ समय-समय पर छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग द्वारा अभियान चलाए जाते रहे हैं। विभाग का कहना रहा है कि नकली शराब, अवैध होलोग्राम, और अवैध बिक्री के नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लेकिन हालिया आरोपों ने इन अभियानों की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई शराब भट्टियों में कथित रूप से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनमें नकली शराब, ‘पार्ट-2’ शराब और बिना अधिकृत होलोग्राम वाली शराब की बिक्री शामिल है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि कार्रवाई चयनात्मक तरीके से की जाती है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज या ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे मामलों में आरोपों की सत्यता स्थापित करने के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच अत्यंत आवश्यक है। यदि हिरासत में दुव्र्यवहार या अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो यह गंभीर विषय है और संबंधित एजेंसियों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। दूसरी ओर, अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके।

इसी बीच, एक अन्य शिकायत ने भी ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें आर्थिक विवाद और कथित धमकी का मुद्दा उठाया गया है। अविनाश कुमार बनर्जी, निवासी न्यू पुलिस लाइन दुर्ग, ने शेखर बंजारे उर्फ चैनदास बंजारे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप है कि एक सप्ताह में राशि लौटाने के आश्वासन पर 1,80,000 रुपये दिए गए थे, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह लेन-देन कई प्रत्यक्षदर्शियों की मौजूदगी में हुआ था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि राशि वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी दी जा रही है। शिकायतकर्ता ने सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि यदि उन्हें किसी प्रकार की जान-माल की हानि होती है, तो उसकी जि मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। इस मामले में भी आधिकारिक जांच और तथ्यात्मक पुष्टि की प्रतीक्षा है। दोनों प्रकरणों ने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां दस्तावेजी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचती हैं। फिलहाल संबंधित आरोपों और शिकायतों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना शेष है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि आरोप गंभीर हैं, तो विभागीय स्तर पर आंतरिक जांच या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। इससे न केवल तथ्यों की स्पष्टता होगी, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी। नागरिक संगठनों का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि कानून का शासन प्रभावी रूप से कायम रह सके। अंतत: यह स्पष्ट है कि किसी भी कार्रवाई या शिकायत के मामले में अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्थापित होता है। जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, आरोपों को दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित एजेंसियों और विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है। शराब दुकानों से जुड़ा एक नया घालमेल सामने आया छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की शराब दुकानों से जुड़ा एक नया घालमेल सामने आया है, जिसने उपभोक्ता अधिकारों और आबकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ग्राहक ने प्रीमियम लिकर शॉप से शराब की बोतल खरीदने के बाद गंभीर अनियमितता का दावा किया। ग्राहक के अनुसार, शराब की बोतल के बॉक्स पर छपे वास्तविक अधिकतम खुदरा मूल्य के ऊपर अलग से बढ़ी हुई कीमत का स्टिकर लगाया गया था, और भुगतान उसी बढ़े हुए रेट के अनुसार लिया गया। ग्राहक ने बताया कि बोतल के पैकेज पर मूल रूक्रक्क 750 रुपये अंकित था, जबकि ऊपर चिपकाए गए स्टिकर पर 920 रुपये लिखा था। घर पहुंचकर जब ग्राहक ने स्टिकर हटाया, तो नीचे छपा वास्तविक रेट देखकर उसके होश उड़ गए। एक बोतल पर करीब 170 रुपये अधिक वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। उपभोक्ता का कहना है कि यदि एक दुकान में ऐसा हो सकता है, तो अन्य दुकानों में भी इसी तरह की अनियमितता से इनकार नहीं किया जा सकता। मामला सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई है। शराब की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें शराब खरीदने वाले कई ग्राहकों का कहना है कि आमतौर पर जल्दबाजी में पैकेजिंग पर लगे छोटे स्टिकर पर ध्यान नहीं जाता, जिसका फायदा दुकानदार उठा सकते हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि ऐसी हजारों बोतलें बेची गई होंगी, जिससे उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से आर्थिक नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के महीनों में शराब की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि कीमत के मुकाबले शराब की क्वालिटी संतोषजनक नहीं है। उनका दावा है कि कई दुकानों पर प्रचलित विदेशी और प्रीमियम ब्रांड उपलब्ध नहीं हैं, जबकि विकल्प के रूप में जो उत्पाद दिए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता अपेक्षाकृत नि न स्तर की महसूस होती है। शहर के कई शराब प्रेमियों का कहना है कि पिछले वर्ष तक जो ब्रांड नियमित रूप से उपलब्ध थे, वे अब कई महीनों से दुकानों में नहीं मिल रहे। इस संबंध में आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक की कमी और लाइसेंस प्रक्रियाओं में देरी इसका एक कारण हो सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बेवरेज कॉरपोरेशन के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं होने और एफएल-10 लाइसेंस एग्रीमेंट कई कंपनियों के साथ पूर्ण न होने से आपूर्ति प्रभावित हुई है। मैंने लालपुर भट्टी में नकली शराब मामलें में उडऩदस्ता टीम के साथ मिलकर कार्रवाई की थी और कोई भी गिर तारी फर्जी नहीं थी फरार आरोपियों की भी तलाश जारी है हमने अपने स्तर पर सही तरीके से काम किया था। -योगेश सोनी, आबकारी उप निरीक्षक जहां ओवर रेटिंग हो रही है और नकली शराब बिक रही है, लिखित शिकायत मिलने पर वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी। -आर संगीता, ढ्ढ्रस्, कमिश्नर आबकारी दो पुलिस अधिकारी एसीबी की कार्रवाई में घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए, निलंबित कोरिया जिले में दो पुलिस अधिकारियों को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने घूस लेते रंगे हाथ पकडऩे के बाद निलंबित कर दिया गया है। आरोपी अधिकारियों ने हत्या के एक केस में शिकायतकर्ता को बचाने के एवज में 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। एसीबी ने शिकायत मिलते ही पहले 25,000 रुपये की पहली किस्त लेते हुए दोषी अधिकारियों को गिर तार किया। गिर तारी के बाद एसपी कोरिया ने दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, प्रार्थी सत्येन्द्र कुमार प्रजापति के घर निर्माण के लिए ईंट बनाने का कार्य मजदूर मोहित घसिया द्वारा किया जा रहा था। कार्य के दौरान खोदे गए गड्ढे में पानी भर गया, जिससे मजदूर मोहित घसिया के बेटे की डूबने से मृत्यु हो गई। मृतक बच्चे की मौत की जांच पुलिस चौकी बचरापोड़ी के एएसआई गुरू प्रसाद यादव द्वारा की जा रही थी। शिकायतकर्ता सत्येन्द्र कुमार प्रजापति के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने उसे आपराधिक प्रकरण से बचाने और केस को रफा-दफा करने के लिए 21 फरवरी को 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। जांच के दौरान एएसआई गुरू प्रसाद यादव ने 22 फरवरी को 25,000 रुपये लेने पर सहमति दी। गुरू प्रसाद यादव के चौकी से स्थानांतरण के बाद चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अब्दुल मुनाफ ने 23 फरवरी को प्रार्थी को 25,000 रुपये लेकर 24 फरवरी को चौकी बुलाया। एसीबी अ िबकापुर की टीम ने उप निरीक्षक अब्दुल मुनाफ को 25,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिर तार किया। इसके साथ ही रिश्वत मांगने के आरोप में सहायक उप निरीक्षक गुरू प्रसाद यादव को भी गिर तार किया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ धारा 7 और 12 पीसी एक्ट 1988 (यथासंशोधित 2018) के तहत अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। मामले में एसीबी ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ जल्द ही कानूनी कार्रवाई पूरी की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के निलंबन और गिर तारी से कोरिया जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ स ती का संदेश गया है। स्थानीय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर रिश्वत लेने या केस रफा-दफा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद आम नागरिकों और शिकायतकर्ताओं में भरोसा बढऩे की संभावना है। एसीबी की सतर्कता और प्रभावी निगरानी ने दिखा दिया कि भ्रष्टाचार और अनुचित आचरण की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाता है।

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