फरसगांव पुलिस का बड़ा साइबर प्रहार, दिल्ली-गाजियाबाद से 7 शातिर साइबर ठग गिरफ्तार

कोण्डागांव। बीमा पॉलिसी बंद होने का डर दिखाकर लाखों रुपए ठगने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का आखिरकार फरसगांव पुलिस ने ऐसा भंडाफोड़ किया कि दिल्ली से गाजियाबाद तक फैले ठगी नेटवर्क की परतें खुल गईं और तीन महीने से फरार घूम रहे सात शातिर साइबर अपराधी पुलिस के शिकंजे में आ गए। थाना फरसगांव पुलिस ने एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तरप्रदेश से कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला उस वक्त सामने आया जब फरियादी शंकरलाल राणा पिता स्वर्गीय संग्राम राणा उम्र 57 वर्ष निवासी कोपरा बाजारपारा थाना फरसगांव को 27 नवंबर 2025 को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बीमा लोकपाल परिषद यानी बी.ओ.सी.ओ. का एजेंट बताते हुए कहा कि उनका बीएसई स्टॉक एक्सचेंज में फंसा 7 लाख 17 हजार 299 रुपए का फंड रिलीज होना है, लेकिन उसके लिए पहले प्रोसेसिंग फीस जमा करनी पड़ेगी। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से खुद को शिव शंकर पाण्डेय, एम.के. बजाज, साक्षी शर्मा, बृज मोहन पाण्डेय और दीपक सिंह बताकर लगातार संपर्क किया और बड़ी ही सफाई से फरियादी को झांसे में लेकर अलग-अलग किश्तों में कुल 29 लाख 69 हजार 673 रुपए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पीड़ित को ठगी का एहसास होने पर थाना फरसगांव में अपराध क्रमांक 29/2026 धारा 318(2), 319, 336(3), 338, 340(2), 61(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह कई वर्षों से संगठित तरीके से साइबर अपराध कर रहा था। आरोपी अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के हैं और फर्जी एजेंट बनकर पहले लोगों का भरोसा जीतते थे, फिर बैंक खाते खुलवाकर रकम ट्रांसफर करवाते थे। गिरोह का मास्टरमाइंड पहले खाताधारकों को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर लिंक करवाने के नाम पर फंसाता था ताकि बैंक खातों पर पूरा नियंत्रण हासिल किया जा सके। इसके बाद पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस राशि और फंड रिलीज के नाम पर रकम वसूली जाती थी। ठगी के लिए आरोपी बार-बार मोबाइल नंबर बदलते थे, छोटे कीपैड फोन इस्तेमाल करते थे और सामान्य फोन का उपयोग केवल रिश्तेदारों से बातचीत के लिए करते थे ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी राजा पहले भी दो बार साइबर अपराध के मामलों में जेल जा चुका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा और प्रभारी पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीमाल के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चंद्रा और एसडीओपी अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम ने लगातार तीन महीने तक बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, सीडीआर, लोकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया। सुराग मिलने पर एसडीओपी अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में पुलिस टीम दिल्ली और उत्तरप्रदेश रवाना हुई। दिल्ली पहुंचते ही आरोपियों को छत्तीसगढ़ पुलिस के आने की भनक लग गई और पूरा गिरोह अंडरग्राउंड हो गया, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। मोबाइल लोकेशन, बैंक डिटेल और नेटवर्क ट्रैकिंग के आधार पर आखिरकार सात आरोपियों को दबोच लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में इसरार अहमद पिता इकरार अहमद उम्र 52 वर्ष निवासी संगम विहार दिल्ली, आकिल पिता इसरार अहमद उम्र 21 वर्ष निवासी खाईखेड़ा थाना हाफिजगंज जिला बरेली हाल संगम विहार दिल्ली, शिवम गुप्ता पिता रमेशचंद्र गुप्ता उम्र 29 वर्ष निवासी संगम विहार दिल्ली, नितिन कुमार त्यागी पिता स्वर्गीय जय कुमार त्यागी उम्र 36 वर्ष निवासी ग्राम सरना गाजियाबाद उत्तरप्रदेश, राजा हुसैन पिता फैरोज उम्र 39 वर्ष निवासी नई दिल्ली, तरुण कौशिक पिता नरेंद्र कुमार शर्मा उम्र 46 वर्ष निवासी रोहतास नगर दिल्ली और प्रदीप बघेल पिता लालता प्रसाद बघेल उम्र 32 वर्ष निवासी हर्ष विहार सेकेंड भोपुरा थाना टोलमोड़ जिला गाजियाबाद उत्तरप्रदेश शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि पहली बार किसी केस में गिरोह के मुख्य साजिशकर्ता और मेन कॉलर तक पहुंच बनाई गई है। आरोपियों को दिल्ली और उत्तरप्रदेश से ट्रांजिट रिमांड पर लाकर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई में एसडीओपी अभिनव उपाध्याय, निरीक्षक राजकुमार सोरी, उप निरीक्षक शशिभूषण पटेल, प्रधान आरक्षक अजय बघेल, रामकुमार ठाकुर, लक्ष्मीनारायण शोरी, महिला आरक्षक सरस्वती यादव, साइबर टीम के प्रधान आरक्षक अजय बघेल और बीज यादव की भूमिका बेहद अहम रही। बहरहाल, फरसगांव पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि मोबाइल कॉल पर भरोसा कर बैंकिंग जानकारी साझा करना अब सीधे साइबर जाल में फंसने जैसा है और डिजिटल दुनिया में एक छोटी लापरवाही जिंदगी भर की कमाई डुबो सकती है।

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