CBSE ने नहीं दिया 12वीं का रिजल्ट तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा छात्र

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सऊदी अरब के एक छात्र द्वारा दायर उस याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें उसने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को उसकी कक्षा 12वीं की इम्प्रूवमेंट परीक्षा का परिणाम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की है. यह मामला जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष आया।
पीठ प्रांशु जीगरकुमार पटेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में इस बात को चुनौती दी है कि कई खाड़ी (गल्फ) देशों में परीक्षाएं रद्द होने से प्रभावित छात्रों के लिए मूल्यांकन योजना तैयार किए जाने के बावजूद सीबीएसई उनका परिणाम घोषित करने में विफल रहा है. पीठ ने छात्र की याचिका पर सीबीएसई से जवाब मांगा और सीबीएसई के वकील को इस मामले पर निर्देश लेने को कहा.
मामले पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा, यह एक बच्चे के करियर का सवाल है, वह अपने सभी कॉलेजों के दाखिले (एडमिशन) से चूक जाएगा… जो कुछ भी हो, दिन-रात एक करके काम पूरा करें. याचिका में तर्क दिया गया कि उनका परिणाम घोषित न होने से उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं खतरे में पड़ गई हैं. वे दाखिले (एडमिशन) के अवसरों से वंचित हो गए हैं।
पटेल ने आगे दावा किया कि इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने 17 मई, 21 मई और 30 मई को सीबीएसई को जो आवेदन भेजे थे, उन पर कोई जवाब नहीं मिला. गौरतलब है कि ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष से पैदा हुए बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण सीबीएसई ने सात मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) देशों- बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं।
याचिकाकर्ता छात्र प्रांशु जीगरकुमार पटेल ने साल 2026 की सीबीएसई 12वीं बोर्ड में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस जैसे पांच विषयों में सुधार (इम्प्रूवमेंट) परीक्षा के लिए एक प्राइवेट छात्र के रूप में सऊदी अरब से फॉर्म भरा था. परीक्षा के शुरुआती दौर में छात्र ने फिजिक्स और केमिस्ट्री के पेपर तो दे दिए, लेकिन इसी बीच ईरान-इजरायल-अमेरिका के बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सीबीएसई ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सऊदी अरब सहित सात खाड़ी देशों में बाकी बची परीक्षाओं को रद्द कर दिया।
इसके बाद सीबीएसई ने प्रभावित छात्रों के लिए आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर नंबर देने की एक विशेष योजना बनाई. विवाद तब शुरू हुआ जब 13 मई को रिजल्ट जारी होने पर सीबीएसई ने इस छात्र का परिणाम रिजल्ट लेटर श्रेणी में डालकर रोक दिया. छात्र का तर्क है कि जब युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों के कारण बाकी नियमित छात्रों को बिना परीक्षा दिए वैकल्पिक नीति से नंबर मिल रहे हैं, तो केवल एक प्राइवेट कैंडिडेट होने की वजह से उनका रिजल्ट रोकना पूरी तरह भेदभावपूर्ण है और इससे उनका पूरा करियर दांव पर लग गया है।

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