CPR रवि मित्तल का “ब्लॉक–ब्लॉक” खेल! जनता के पैसे से वेतन, लेकिन पत्रकारों से नफरत — क्या यही है जनसंपर्क?

CPR रवि मित्तल का “ब्लॉक–ब्लॉक” खेल! जनता के पैसे से वेतन, लेकिन पत्रकारों से नफरत — क्या यही है जनसंपर्क ?

रायपुर – कमिश्नर पब्लिक रिलेशन (CPR) — नाम में पब्लिक है, काम में घमंड। जनता के टैक्स से मोटी तनख्वाह लेने वाले ये साहब न जनता से जुड़ते हैं, न पत्रकारों से बात करते हैं। और मज़ेदार बात यह कि जिस विभाग का काम ही संवाद है, वही विभाग संवाद से भाग रहा है। छत्तीसगढ़ छोड़िए, राजधानी रायपुर में मौजूद लगभग 500 पत्रकारों में से CPR रवि मित्तल मुश्किल से 5 लोगों को ही “एंटरटेन” करते हैं। बाकी सैकड़ों पत्रकार इनके लिए जैसे अस्तित्वहीन हैं।


सूचना चाहिए? फोन नहीं उठेगा।

सवाल पूछा? जवाब नहीं मिलेगा।

सरकार की नाकामी उजागर की? सीधा फोन ब्लॉक।

क्या यही है जनसंपर्क विभाग का लोकतांत्रिक चेहरा?

जनसंपर्क विभाग कोई मामूली दफ्तर नहीं, यह मुख्यमंत्री का सीधा विभाग है, एक संवेदनशील और सबसे अहम विभाग। सरकार की योजनाएं यहीं से निकलकर गांव–गांव, गली–गली तक पहुंचती हैं। मुख्यमंत्री की छवि संवरती–बिगड़ती इसी विभाग से होती है। सरकार बनती भी यहीं है, और गिरती भी।

लेकिन जब CPR रवि मित्तल पत्रकारों से संवाद ही नहीं करेंगे, फोन उठाना तो दूर, ब्लॉक करने को हथियार बना लेंगे, तो साफ है—यह सरकार को मजबूत नहीं, बल्कि बदनाम और कमजोर करने का खेल है।
यह अफसरशाही का घमंड नहीं तो और क्या है?

यह जनसंपर्क नहीं, बल्कि जनता और पत्रकारों से दूरी की साजिश है।

सवाल साफ है। क्या CPR अधिकारी सरकार के लिए काम कर रहे हैं? या अपने अहंकार के लिए? क्या सूचना दबाकर, सवालों से भागकर, फोन ब्लॉक करके लोकतंत्र चलेगा? अगर यही रवैया रहा, तो सरकार की सबसे बड़ी दुश्मन विपक्ष नहीं, बल्कि उसके अपने जनसंपर्क अधिकारी साबित होंगे।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x