“ग्राहक ऑनलाइन भुगतान नहीं करते, बैंक अपने पसंदीदा ग्राहकों को ही दे देते हैं चिल्लर” — राजेश सेतपाल
तिल्दा-नेवरा। तिल्दा-नेवरा में इन दिनों छोटे नोट और चिल्लर (₹10, ₹20, ₹50 के नोट एवं सिक्के) की कमी व्यापारियों और आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। किराना, सब्जी, अनाज और फुटकर व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि पर्याप्त चिल्लर नहीं मिलने से रोजमर्रा के लेन-देन में परेशानी हो रही है।
स्थानीय अनाज व्यापारी राजेश सेतपाल ने बताया कि आज भी बड़ी संख्या में ग्राहक ऑनलाइन भुगतान नहीं करते, बल्कि नकद लेन-देन को ही प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में छोटे नोट और चिल्लर की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।
राजेश सेतपाल का आरोप है कि बैंकों से पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट और सिक्के उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बैंक अधिकारी सीमित मात्रा में चिल्लर लाते हैं और उसमें से भी अपने परिचित या पसंदीदा ग्राहकों को प्राथमिकता देकर वितरण कर देते हैं। इससे सामान्य व्यापारियों को पर्याप्त चिल्लर नहीं मिल पाती।
व्यापारियों का कहना है कि कई बार ग्राहकों को छुट्टे पैसे नहीं होने के कारण सामान कम देना पड़ता है या बाद में पैसे लौटाने की स्थिति बन जाती है, जिससे अनावश्यक विवाद भी पैदा होते हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित बैंक प्रबंधन से मांग की है कि तिल्दा-नेवरा की सभी बैंक शाखाओं में पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट और सिक्कों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा उनका समान और पारदर्शी वितरण किया जाए, ताकि सभी व्यापारियों और आम नागरिकों को राहत मिल सके।नेवरा में छोटे नोट और चिल्लर का संकट, व्यापारी परेशान
“ग्राहक ऑनलाइन भुगतान नहीं करते, बैंक अपने पसंदीदा ग्राहकों को ही दे देते हैं चिल्लर” — राजेश सेतपाल
तिल्दा-नेवरा। तिल्दा-नेवरा में इन दिनों छोटे नोट और चिल्लर (₹10, ₹20, ₹50 के नोट एवं सिक्के) की कमी व्यापारियों और आम लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। किराना, सब्जी, अनाज और फुटकर व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि पर्याप्त चिल्लर नहीं मिलने से रोजमर्रा के लेन-देन में परेशानी हो रही है।
स्थानीय अनाज व्यापारी राजेश सेतपाल ने बताया कि आज भी बड़ी संख्या में ग्राहक ऑनलाइन भुगतान नहीं करते, बल्कि नकद लेन-देन को ही प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में छोटे नोट और चिल्लर की आवश्यकता लगातार बनी रहती है।
राजेश सेतपाल का आरोप है कि बैंकों से पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट और सिक्के उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बैंक अधिकारी सीमित मात्रा में चिल्लर लाते हैं और उसमें से भी अपने परिचित या पसंदीदा ग्राहकों को प्राथमिकता देकर वितरण कर देते हैं। इससे सामान्य व्यापारियों को पर्याप्त चिल्लर नहीं मिल पाती।
व्यापारियों का कहना है कि कई बार ग्राहकों को छुट्टे पैसे नहीं होने के कारण सामान कम देना पड़ता है या बाद में पैसे लौटाने की स्थिति बन जाती है, जिससे अनावश्यक विवाद भी पैदा होते हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित बैंक प्रबंधन से मांग की है कि तिल्दा-नेवरा की सभी बैंक शाखाओं में पर्याप्त मात्रा में छोटे नोट और सिक्कों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा उनका समान और पारदर्शी वितरण किया जाए, ताकि सभी व्यापारियों और आम नागरिकों को राहत मिल सके।






