मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक 73 वर्षीय बुजुर्ग के साथ हुई घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप है कि सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन स्ट्रोक से पीडि़त बुजुर्ग को पुलिस ने शराब के नशे में होने का संदेह मानते हुए समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया इससे इलाज में देरी हुई और उनकी हालत गंभीर हो गई। वर्तमान में उनका उपचार आईसीयू में चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व कारोबारी शरद कदम 25 जुलाई की सुबह वर्सोवा क्षेत्र में कार चला रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक ब्रेन स्ट्रोक आया, जिससे वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया और उनकी कार दूसरी गाड़ी से टकरा गई। दुर्घटना मामूली थी, लेकिन इसके बाद की कार्रवाई विवाद का कारण बन गई।
परिजनों का कहना है कि स्ट्रोक के कारण शरद कदम स्पष्ट रूप से बोल नहीं पा रहे थे और उनकी हालत बिगड़ रही थी। इसके बावजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें नशे में होने की आशंका के आधार पर थाने ले जाकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। परिवार का आरोप है कि उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया, जिससे उपचार में करीब 12 घंटे की देरी हुई और बाद में उन्हें लकवा (पैरालिसिस) का सामना करना पड़ा।
परिवार ने यह भी दावा किया कि मौके पर उनका ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट नहीं कराया गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्ट्रोक की पहचान कर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
वहीं, वर्सोवा पुलिस ने इन आरोपों से अलग पक्ष रखा है। पुलिस के अनुसार, शरद कदम को जांच के लिए कूपर अस्पताल ले जाया गया था और वहां ब्लड टेस्ट की प्रक्रिया अपनाई गई। पुलिस का यह भी कहना है कि उन्होंने डॉक्टरों के सामने शराब पीने की बात स्वीकार की थी। हालांकि बाद में नानावटी अस्पताल में हुई चिकित्सकीय जांच में उनके शरीर में शराब की पुष्टि नहीं हुई।
इस घटना के बाद मामला राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। भाजपा विधायक अमित साटम ने पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि ब्रेन स्ट्रोक के स्पष्ट लक्षण होने के बावजूद बुजुर्ग को तत्काल अस्पताल क्यों नहीं भेजा गया।
फिलहाल मामले को लेकर पुलिस और परिवार के दावों के बीच विरोधाभास बना हुआ है और पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग तेज हो गई है।
ब्रेन स्ट्रोक पीडि़त बुजुर्ग को शराबी समझने का आरोप, इलाज में देरी पर पुलिस घिरी


