महादेव सट्टा एप मामला: हाईकोर्ट से कंपनियों को बड़ी राहत, 423 करोड़ के शेयर बेचकर सुरक्षित निवेश की अनुमति

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महादेव ऑनलाइन सट्टा एप और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संबंधित कंपनियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा फ्रीज किए गए करीब 423 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों और डीमैट खातों की वास्तविक कीमत सुरक्षित रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं।

जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव होता रहता है और फ्रीज किए गए शेयरों की कीमत में गिरावट आने पर संपत्ति का मूल्य कम हो सकता है। इसे देखते हुए अदालत ने कंपनियों को फ्रीज किए गए शेयर बेचकर प्राप्त राशि को ईडी की निगरानी में सुरक्षित म्यूचुअल फंड या सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) में निवेश करने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निवेश की गई पूरी राशि ईडी के नियंत्रण में रहेगी और कंपनियां उस राशि का उपयोग या निकासी नहीं कर सकेंगी। अदालत ने कहा कि पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत संपत्ति को फ्रीज या अटैच करने का उद्देश्य उसकी सुरक्षा और मूल्य को बनाए रखना है। यदि बाजार में गिरावट के कारण संपत्ति का मूल्य घट जाता है, तो फ्रीज करने का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा।

गौरतलब है कि ईडी ने वर्ष 2022 में महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा एप मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का प्रकरण दर्ज किया था। जांच के दौरान एजेंसी को संदेह हुआ कि सट्टेबाजी से अर्जित कथित अवैध धन को कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर टिबरेवाल और सूरज चोखानी के जरिए विभिन्न कंपनियों में निवेश किया गया। ईडी के अनुसार इस धन का उपयोग शेयर बाजार में निवेश के लिए किया गया था।

इसके बाद 28 फरवरी 2024 को ईडी ने कार्रवाई करते हुए आठ कंपनियों के डीमैट और ट्रेडिंग खातों को फ्रीज कर दिया था। इन खातों में मौजूद शेयरों का मूल्य 29 फरवरी 2024 की स्थिति में लगभग 423.60 करोड़ रुपये आंका गया था।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि भविष्य में चाहे कंपनियां मामले में सफल हों या सरकार संपत्ति जब्त करे, दोनों ही परिस्थितियों में संपत्ति की वास्तविक कीमत सुरक्षित रहना आवश्यक है। अदालत ने यह भी माना कि ईडी कोई निवेश प्रबंधन एजेंसी नहीं है, लेकिन संपत्ति के मूल्य संरक्षण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।

यह आदेश महादेव एप मामले से जुड़े आर्थिक पहलुओं और फ्रीज संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है।

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