भोपाल (ग्रामीण) पुलिस एवं आवाज़ संस्था के संयुक्त तत्वावधान में POCSO अधिनियम पर बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों एवं ऊर्जा डेस्क प्रभारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
भोपाल। भोपाल (ग्रामीण) पुलिस एवं संस्था आवाज़ (AAWAJ) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों एवं ऊर्जा डेस्क प्रभारियों के लिए POCSO अधिनियम विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बाल लैंगिक शोषण से जुड़े मामलों में पुलिस अधिकारियों की संवेदनशीलता बढ़ाना तथा पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं प्रभावी सहायता सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पुलिस अधीक्षक भोपाल (ग्रामीण) पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित मामलों में पुलिस को विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा लैंगिक शोषण का शिकार होता है, तो केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पुनर्वास, संरक्षण एवं मनोवैज्ञानिक सहयोग पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पीड़ित के दृष्टिकोण से कानून का पालन करने पर न्याय अधिक प्रभावी और मानवीय बनता है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रमोद कुमार सोनकर भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक एवं आवाज़ संस्था के निदेशक श्री प्रशांत दुबे ने बताया कि POCSO प्रकरणों में पीड़ित बच्चों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक है, जिससे उनके पुनर्वास की प्रक्रिया समय पर प्रारंभ हो सके। उन्होंने सपोर्ट पर्सन की भूमिका, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक सहयोग, सामाजिक पुनर्वास तथा POCSO अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी और प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री पाण्डेय ने आवाज़ संस्था द्वारा विकसित POCSO आधारित “सांप-सीढ़ी” जागरूकता मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने इसे बच्चों एवं आमजन को कानून की जानकारी सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने वाला अभिनव प्रयास बताते हुए संस्था की सराहना की।
कार्यक्रम में अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) मंजू चौहान (ईंटखेड़ी), अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) वैशाली सिंह कराहलिया, जिले के सभी सातों थानों के थाना प्रभारी, ऊर्जा डेस्क प्रभारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी सहित लगभग 45 अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
आवाज़ संस्था की ओर से रोली शिवहरे, नितेश व्यास, कासिफा मंसूरी एवं पवनरेखा बिसेन ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए लैंगिक शोषण से प्रभावित बच्चों के पुनर्वास, सहायता तंत्र और समन्वित कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।






