सड़क दुर्घटनाएं रोकने की नई तैयारी, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद का पुनर्गठन; केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में 69 सदस्य संभालेंगे कमान

नई दिल्ली

 देश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में लगभग पौने दो लाख लोगों की मौत के बावजूद अब तक रही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सुस्ती अब धीरे-धीरे टूट रही है।

सात साल प्रतीक्षा के बाद इसी वर्ष जुलाई में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया और अब राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद का नए सिरे से गठन भी मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद किया गया है।

ध्यान रहे कि परिषद तो इससे पहले भी थी, लेकिन अगस्त 2023 में बनाई गई परिषद का पूरा कार्यकाल बिना एक भी बैठक के ही खत्म हो गया।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री की अध्यक्षता में पुनर्गठित इस परिषद का दायित्व है कि राज्यों के तालमेल से सड़क सुरक्षा की समीक्षा कर नीति निर्धारण की दिशा में बढ़ा जाए।

सात साल बाद राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद का पुनर्गठन हुआ

केंद्रीय सरकार मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 215 के अधीन राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के गठन का कानूनी प्रविधान है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ समय-समय पर इसकी आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं, ताकि सड़क सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की इकाई सक्रियता से काम करे, जिसमें राज्यों और संबंधित विशेषज्ञों की भी भागीदारी हो।

परिषद का गठन समय-समय पर होता रहा, लेकिन इसने सक्रियता से काम नहीं किया। अब मंत्रालय ने पिछले कुछ समय से जरूर हाईवे की गुणवत्ता से लेकर सड़क सुरक्षा पर मंथन तेज किया है।

इसी क्रम में मंत्रालय ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री करेंगे।

दो सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री उपाध्यक्ष होंगे, जबकि सदस्यों में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सड़क परिवहन मंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, एनएचएआइ अध्यक्ष, महानिदेशक सड़क विकास, गृह मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि सहित कुल 69 सदस्य होंगे।

सदस्य सचिव के रूप में मंत्रालय के अपर सचिव या संयुक्त सचिव रहेंगे। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि परिषद वर्ष में कम से कम एक बार अपनी बैठक करेगी।

यह परिषद इसलिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं की समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। एक राज्य में पंजीकृत वाहन दूसरे राज्य की सड़कों पर चलते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग कई राज्यों से गुजरते हैं और दुर्घटनाओं के कारण भी अनेक स्थानों पर समान होते हैं।

ऐसे में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद एक साझा मंच प्रदान कर सकती है, जहां राज्य अपने अनुभव साझा करें और दुर्घटनाएं रोकने के सफल उपायों को दूसरे राज्यों में भी अपनाया जा सके। नीति निर्धारण के लिए सभी जिम्मेदार भी एक मंच पर होंगे।

दो वर्ष में नहीं हुई थी बैठक, सदस्यों का कार्यकाल भी समाप्त

आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने परिषद के निष्क्रिय पड़े रहने का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उठाया था। उन्होंने अगस्त 2025 में सड़क सुरक्षा संबंधी जनहित याचिका दाखिल कर परिषद को सक्रिय बनाने और नियमित बैठकें आयोजित कराने की मांग की थी।

उन्हें सूचना के अधिकार के तहत सरकार द्वारा जानकारी दी गई थी कि अगस्त 2023 में पुनर्गठन के बाद परिषद की एक भी बैठक नहीं हुई थी।

इसके अलावा परिषद की कार्यकारी समिति भी गठित नहीं की गई थी और मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल भी समाप्त हो गया था। इस प्रकार सड़क सुरक्षा के लिए बनी देश की सर्वोच्च सलाहकार संस्था के रूप में परिषद व्यावहारिकता में निष्क्रिय पड़ी थी।

 

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